कटनी का ‘हाल’ या ‘बेहाल’? टैक्स देने वाली जनता त्रस्त, अफसर मस्त; क्या इस मानसून में डूब जाएगा शहर?

आइए, हम दिखाते हैं अपना सुंदर कटनी शहर’— जहाँ विकास के नाम पर खुदी पड़ी हैं सड़कें, धूल और गड्ढों से जनता का हाल बेहाल!

विशेष रिपोर्ट – सत्य संवाद

कटनी।

कहने को तो कटनी ‘स्मार्ट’ बनने की राह पर है, लेकिन धरातल की सच्चाई यह है कि आज कटनी शहर में सड़कों पर चलना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं रह गया है। शहर में चल रहा सीवरेज (सिविल) लाइन का काम अब विकास नहीं, बल्कि नगरवासियों और बाहर से आने वाले मुसाफिरों के लिए ‘जीते-जी जी का जंजाल’ बन चुका है। जगह-जगह खुदे पड़े गड्ढे, हवा में उड़ती धूल और चरमराई यातायात व्यवस्था को देखकर आज हर कटनी वासी यही पूछ रहा है— “यह कटनी का विकास हो रहा है या विनाश?”

देश का बड़ा रेलवे हृदय-स्थल, पर अव्यवस्था का शिकार!

​कटनी की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति को समझें तो कटनी भारतीय रेलवे यातायात का एक बेहद महत्वपूर्ण और देश के सबसे बड़े जंक्शनों में से एक माना जाता है। यह एक ऐसा अनूठा शहर है, जहाँ यात्रियों की सुविधा और ट्रेनों के सुगम संचालन के लिए तीन-तीन बड़े रेलवे स्टेशन— कटनी जंक्शन (KTE), मुड़वारा जंक्शन (KMZ) और कटनी साउथ जंक्शन (KTES) मौजूद हैं। देश के कोने-कोने से रोजाना हजारों यात्री और सैकड़ों ट्रेनें यहाँ से गुजरती हैं। लेकिन अफ़सोस, इतने बड़े रेलवे हब की धड़कन कहे जाने वाले रास्तों को ही प्रशासनिक लापरवाही ने पंगु बना दिया है।

मुख्य मार्ग और शहरी क्षेत्र बने ‘जाम के टापू’, घंटों रेंग रही जिंदगी!

​इस समय शहर की सबसे बड़ी मुसीबत यहाँ की यातायात व्यवस्था बन चुकी है। सिविल लाइन की बेतरतीब खुदाई के चलते शहर के मुख्य मार्गों से लेकर अंदरूनी शहरी क्षेत्रों (बाजारों और रिहायशी इलाकों) में रोजाना घंटों का लंबा जाम लग रहा है।

  • सड़कें हुईं संकरी: आधी से ज्यादा सड़क खोदकर मलबा वहीं छोड़ दिए जाने के कारण चौड़े रास्ते भी पतली गलियों में तब्दील हो चुके हैं।
  • घंटों की कतारें: सुबह स्कूल-कॉलेज के समय से लेकर देर शाम तक मिशन चौक, बरगवां, और मुख्य बाजारों में गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। जो सफर 5 मिनट में पूरा होना चाहिए, उसके लिए जनता को एक-एक घंटे तक धूप और धूल के बीच गाड़ियां बंद करके खड़े रहना पड़ रहा है।

मुख्य मार्ग बने ‘मुसीबत के मार्ग’, स्टेशनों तक जाना हुआ दूभर

​हैरानी की बात तो यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने शहर की लाइफलाइन यानी मुख्य मार्गों को ही खोदकर लावारिस छोड़ दिया है।

  • बरगवां से मिशन चौक तक का मुख्य मार्ग पूरी तरह खुदा पड़ा है।
  • झिंझरी तिराहे से लेकर माधव नगर गेट तक सड़क की धज्जियां उड़ चुकी हैं।

​ये वो मुख्य मार्ग हैं जो कटनी के धड़कते दिल हैं और कटनी जंक्शन, मुड़वारा स्टेशन तथा साउथ स्टेशन जैसे बड़े रेलवे केंद्रों को आपस में जोड़ते हैं। आज इन रास्तों पर चलना नरक भोगने जैसा हो गया है। ट्रेन पकड़ने की जल्दी में निकले मुसाफिर इस भीषण जाम और गड्ढों में फंसकर अपनी ट्रेनें चूक रहे हैं।

भट्टा मोहल्ला रोड का बुरा हाल, बाहरी नागरिकों में कटनी की किरकिरी!

​अब बात करते हैं भट्टा मोहल्ला रोड की, जहाँ से लेकर कटनी साउथ स्टेशन तक का पूरा रास्ता सीवरेज लाइन की भेंट चढ़ चुका है। इस बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है बाहर से आने वाले रेल यात्रियों को।

  • जेब पर डाका: रास्ता खराब होने और घंटों लगने वाले जाम के कारण ऑटो और ई-रिक्शा चालक मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। वे यात्रियों से मनमाना, दोगुना-तिगुना किराया वसूल रहे हैं।
  • कटनी की खराब छवि: जब देश के किसी दूसरे राज्य या शहर का नागरिक हमारे इस महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन पर कदम रखता है, तो स्टेशन से बाहर निकलते ही वह महाजाम और धूल के गुबार में फंस जाता है। वह जब यहाँ से अपने शहर वापस लौटेगा, तो कटनी की इस दुर्दशा की कहानी पूरी दुनिया को सुनाएगा।

ईमानदार जनता भर रही टैक्स, बदले में मिल रहा सिर्फ ‘गड्ढा’ और ‘ट्रैफिक जाम’

​कटनी की जनता की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह शहर ईमानदारी से नगर निगम को सबसे ज्यादा टैक्स चुकाने वाले शहरों में शुमार है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आम जनता यह भारी-भरकम टैक्स किसलिए भरती है? सुविधाओं के लिए या इन जानलेवा असुविधाओं के लिए?

  • रोजाना हो रहे एक्सीडेंट: खुदे हुए गड्ढों और जाम में गाड़ियों की आपाधापी के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक और स्टेशन जा रहे यात्री फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।
  • इमरजेंसी सेवाएं लाचार: सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि घंटों तक जिंदगी और मौत से जूझते मरीज एंबुलेंस में फंसे रहते हैं, क्योंकि सिविल लाइन की खुदाई के कारण लगने वाले इस महाजाम को साफ कराने वाला ग्राउंड जीरो पर कोई प्रशासनिक व्यक्ति या ट्रैफिक पुलिस का जवान दिखाई ही नहीं देता।

बड़ा सवाल: क्या शासन-प्रशासन और नगर निगम पूरी तरह भ्रष्ट हो चुका है?

​शहर के इस बदतर हाल को देखकर आज जनता के मन में यह गंभीर सवाल उठ रहा है कि क्या हमारा शासन-प्रशासन और नगर निगम पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुका है? ऐसा लगता है कि कुर्सियों पर बैठे ज़िम्मेदारों को अपने सिवाय जनता और उनकी तकलीफों से कोई लेना-देना ही नहीं रह गया है। आम जनता और देश भर से आने वाले रेल यात्री रोज़ किन असुविधाओं और खतरों से जूझते हुए सफ़र कर रहे हैं, इससे एसी कमरों में बैठे अफ़सरों और नेताओं को कोई सरोकार नहीं है। ठेकेदारों को खुली छूट दे दी गई है और जनता को उनके रहमों-करम पर तड़पने के लिए छोड़ दिया गया है।

अतिक्रमण हटा दिया, नालियां खोद दीं… अब बरसात में क्या होगा?

​एक तरफ सीवरेज लाइन के गड्ढे पहले से ही मुसीबत बने हुए थे, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर पूरे शहर की नालियों को भी खोद कर रख दिया है। अब मानसून (बरसात) बेहद करीब है। ऐसे में ‘सत्य संवाद’ प्रशासन और स्थानीय नेताओं से सीधे कुछ तीखे सवाल पूछता है:

  1. क्या यह सीवरेज और नाली का अधूरा काम बरसात शुरू होने से पहले पूरा हो पाएगा?
  2. तीनों बड़े स्टेशनों (कटनी जंक्शन, मुड़वारा, साउथ) जाने वाले मुसाफिरों, रोजाना घंटों जाम में फंसने वाली जनता की इस प्रताड़ना का जवाबदार कौन है?
  3. क्या कटनी वासियों को इस बार पूरी बरसात महाजाम, जलभराव, कीचड़ और हादसों के साए में गुजारनी पड़ेगी?

सत्य संवाद की दो टूक:

​अब देखना यह है कि ‘सत्य संवाद’ पर इस ग्राउंड रिपोर्ट और तीखे समाचार के प्रकाशन के बाद क्या शासन, प्रशासन और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी किसी एक्शन (क्रिया) में आते हैं? क्या देश के इस महत्वपूर्ण रेलवे केंद्र के बंद रास्तों, गड्ढों और इस बदतर जाम से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, या फिर हमेशा की तरह कटनी की भोली-भाली जनता और यहाँ आने वाले मुसाफिरों को आने वाले पूरे मानसून में इन्हीं जानलेवा समस्याओं का सामना करते हुए नारकीय जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ेगा?

​विकास के नाम पर जनता की जिंदगी और शहर की साख से खिलवाड़ का यह खेल अब बंद होना चाहिए!

– ब्यूरो रिपोर्ट, सत्य संवाद।

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