
कटनी में बड़ा भू-घोटाला: लाल पहाड़ी की करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल; कमिश्नर तपस्या परिहार ने बैठाई जांच
कटनी/बरगवां:
कटनी के बरगवां क्षेत्र स्थित लाल पहाड़ी की बहुमूल्य शासकीय भूमि को लेकर एक बहुत बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है। आरोप है कि पिछले कई वर्षों से रसूखदार भू-माफियाओं और कुछ विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की साठगांठ से करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने का खेल चल रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम कमिश्नर तपस्या परिहार ने सख्त रुख अपनाते हुए पूरे प्रकरण की औपचारिक जांच शुरू करवा दी है। शुक्रवार (23 मई) से इस कथित जमीन घोटाले की फाइलें खंगाली जाने लगी हैं।
फर्जी NOC और हाईकोर्ट के आदेशों के दुरुपयोग का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को साक्ष्यों व दस्तावेजों के साथ एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरकारी भूमि को कूटरचित दस्तावेजों के सहारे निजी बताकर ऊंचे दामों पर बेच दिया गया। यही नहीं, प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए फर्जी तरीके से एनओसी (NOC) जारी कराई गई और माननीय हाईकोर्ट के आदेशों का गलत हवाला देकर अधिकारियों को गुमराह किया गया। शिकायत में फर्जी एनओसी को तत्काल निरस्त करने तथा इस सिंडिकेट में शामिल भू-माफियाओं और भ्रष्ट अफसरों पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
जांच के दायरे में आए ये मुख्य बिंदु:
कमिश्नर द्वारा गठित जांच टीम मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी:
- बिना दस्तावेज NOC कैसे? करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि के लिए बिना पुख्ता वैधानिक दस्तावेजों के एनओसी कैसे और किसके इशारे पर जारी हुई?
- फाइलों पर किसके दस्तखत? किन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इन संदिग्ध फाइलों को आगे बढ़ाया गया और मंजूरी दी गई?
- कोर्ट के आदेशों का भ्रम: क्या सच में हाईकोर्ट के आदेशों का गलत संदर्भ देकर प्रशासन को भ्रमित करने का प्रयास किया गया?
- फाइल दबाने का खेल: नियमों को ताक पर रखकर भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए फाइलों को दबाने में किसकी भूमिका रही?
दोषियों पर एफआईआर (FIR) की तैयारी, रसूखदारों में हड़कंप
नगर निगम कमिश्नर तपस्या परिहार के इस कड़े कदम के बाद कटनी के भू-माफियाओं और उनसे जुड़े रसूखदार लोगों में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह शहर के सबसे बड़े भू-घोटालों में से एक हो सकता है। जांच रिपोर्ट सामने आते ही न सिर्फ फर्जी एनओसी को निरस्त किया जाएगा, बल्कि इस पूरे खेल में शामिल सफेदपोशों और विभागीय दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर जेल भेजने की तैयारी भी की जा रही है।
– ब्यूरो रिपोर्ट, शब्द संवाद समाचार (कटनी)
