हाईकोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा रहे दबंग, पीड़ित किसान पहुंचा एसपी दफ्तर; रीठी थाना पुलिस पर मिलीभगत के आरोप

​कटनी/रीठी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से जमीन की बिक्री और बेदखली पर स्थगन आदेश (Stay Order) मिलने के बावजूद पीड़ित किसान न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। रीठी थाना क्षेत्र का यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है, जहां पुलिस पर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना कराने और दबंगों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगा है।

​क्या है पूरा मामला?

जमीन संबंधी विवाद में आवेदक सोमदत्त तिवारी ने जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की अदालत ने अपील क्रमांक SA 1417/25 पर सुनवाई करते हुए जुलाई माह में विवादित भूमि पर रोक लगाई थी। इसके बाद 7 अगस्त को हुई सुनवाई में अदालत ने अपीलार्थी को राहत देते हुए प्रकरण के अंतिम आदेश तक के लिए स्थगन (Stay) प्रभावी कर दिया।

​दबंग कर रहे खेती में दखल, दी जान से मारने की धमकी

कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी अनावेदक सुरेश तिवारी और उसके दो बेटों—सुनील तिवारी एवं कौशल तिवारी द्वारा सोमदत्त तिवारी को खेत में काम करने और मजदूरों से खेती कराने में लगातार अड़चनें डाली जा रही हैं। पीड़ित का आरोप है कि दबंगों ने उन्हें रास्ते में रोककर दो बार जान से मारने की धमकी भी दी है।

​डीएसपी के निर्देशों को भी रीठी पुलिस ने किया दरकिनार

पीड़ित सोमदत्त तिवारी ने पहली बार 7 जुलाई को जनसुनवाई में शिकायत की थी। तब जनसुनवाई ले रहे डीएसपी मिश्रा ने रीठी थाना प्रभारी (TI) को फोन पर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ‘सोमदत्त तिवारी के पक्ष में हाईकोर्ट का आदेश है, इसलिए सुरेश तिवारी और उसके बेटों को खेत पर जाने से रोका जाए।’ आरोप है कि रीठी पुलिस ने इस निर्देश पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

​एसपी कार्यालय की जनसुनवाई में फिर उठा मुद्दा

कार्रवाई न होने से परेशान होकर पीड़ित ने 8 सितंबर को पुनः एसपी कार्यालय पहुंच कर जनसुनवाई में गुहार लगाई। जब डीएसपी मिश्रा ने फिर से रीठी थाना प्रभारी से फोन पर जवाब तलब किया, तो थाना प्रभारी ने बहानेबाजी करते हुए यह दावा कर दिया कि दोनों पक्ष रोज लड़ते हैं और पीड़ित का गाली-गलौज करते हुए वीडियो है। हालांकि, ऐसा कोई भी वीडियो डीएसपी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।

​पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

पीड़ित सोमदत्त तिवारी का सीधा आरोप है कि रीठी थाना प्रभारी अनावेदकों से साठगांठ कर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करवा रहे हैं। जब पीड़ित ने धमकी मिलने की शिकायत की, तो पुलिस ने टालमटोल रवैया अपनाते हुए कह दिया कि “हमारे सामने धमकी नहीं दी गई, तो हम कैसे मानें?”

​न्यायालय के अंतिम आदेश तक स्टे होने के बावजूद पुलिस की यह उदासीनता कानून व्यवस्था और पीड़ित सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पीड़ित ने वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।