प्यार के आगे छोटी पड़ीं मजहब और सलाखों की दीवारें: सतना की महिला जेल अधिकारी ने पूर्व कैदी संग रचाई शादी

सतना/ कहते हैं कि मोहब्बत न सरहद देखती है, न मजहब और न ही अतीत की कड़वाहट। मध्य प्रदेश के सतना जिले से प्रेम और साहस की एक ऐसी ही मिसाल सामने आई है, जिसने सामाजिक बंधनों और धार्मिक दीवारों को तोड़ दिया है। यहाँ केंद्रीय जेल में पदस्थ एक महिला सहायक जेल अधीक्षक ने जेल में ही सजा काट चुके एक पूर्व कैदी के साथ सात फेरे लेकर जीवन की नई पारी शुरू की है।

📍 ड्यूटी के दौरान परवान चढ़ा प्यार

​यह अनूठी प्रेम कहानी सतना केंद्रीय जेल की चहारदीवारी के भीतर शुरू हुई थी। रीवा की रहने वाली फिरोजा खातून यहाँ सहायक जेल अधीक्षक के पद पर कार्यरत थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात धर्मेंद्र सिंह (निवासी चंदला) से हुई।

  • कैसे हुई शुरुआत: फिरोजा उस वक्त जेल में वारंट इंचार्ज थीं और धर्मेंद्र वारंट का काम संभालता था।
  • दोस्ती से शादी तक: साथ काम करते हुए दोनों के बीच गहरी दोस्ती हुई, जो समय के साथ प्यार में बदल गई। दोनों ने फैसला किया कि वे अपने धर्म और समाज की परवाह किए बिना एक-दूसरे का हाथ थामेंगे।

⚖️ हत्या के मामले में उम्रकैद काट चुका है दूल्हा

​धर्मेंद्र सिंह का अतीत चुनौतियों भरा रहा है। वर्ष 2007 में चंदला नगर परिषद के उपाध्यक्ष की हत्या के मामले में उसे उम्रकैद की सजा हुई थी। उसने अपने जीवन के 14 साल जेल की सलाखों के पीछे बिताए। हालांकि, जेल के भीतर उसके अच्छे आचरण को देखते हुए प्रबंधन ने उसे 4 साल पहले रिहा कर दिया था। जेल से बाहर आने के बाद भी फिरोजा और धर्मेंद्र का रिश्ता कायम रहा और अब दोनों विवाह के बंधन में बंध गए।

🔥 वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई शादी

​मंगलवार को छतरपुर के लवकुश नगर में यह विवाह पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फिरोजा और धर्मेंद्र ने सात फेरे लिए। यह शादी अब पूरे इलाके और जेल महकमे में चर्चा का विषय बनी हुई है।

“इंसानियत और प्रेम का कोई मजहब नहीं होता। कानून की मर्यादा और वर्दी का फर्ज निभाने के साथ-साथ एक अधिकारी ने जीवन की नई मिसाल पेश की है।” > — जेल विभाग के सहकर्मियों की प्रतिक्रिया

 

ब्यूरो रिपोर्ट: सत्य संवाद समाचार

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