महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय में दूसरे दिन भी हड़ताल जारी: प्रबंधन के अड़ियल रुख से कर्मचारियों में भारी आक्रोश, स्थानीय प्रशासन भी मौन

महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय में दूसरे दिन भी हड़ताल जारी: प्रबंधन के अड़ियल रुख से कर्मचारियों में भारी आक्रोश, स्थानीय प्रशासन भी मौन

कटनी (सत्य संवाद समाचार)। महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय करौंदी में उचित वेतन वृद्धि और श्रम अधिकारों को लेकर शुरू हुआ कर्मचारियों का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। कड़ाके की धूप और विपरीत परिस्थितियों के बीच आज दूसरे दिन भी कर्मचारियों का सामूहिक धरना प्रदर्शन पूरी ताकत के साथ जारी रहा। विश्वविद्यालय के श्रमिक, बस ड्राइवर, कंडक्टर और कंप्यूटर ऑपरेटर अपनी जायज मांगों को लेकर परिसर में ही डटे हुए हैं, जिसके चलते विश्वविद्यालय की परिवहन व्यवस्था सहित कई मूलभूत सेवाएं पूरी तरह ठप हो चुकी हैं।

प्रबंधन के उदासीन और संवेदनहीन रुख से भड़का कर्मचारियों का गुस्सा

​हड़ताल के दूसरे दिन कर्मचारियों का गुस्सा विश्वविद्यालय प्रबंधन के प्रति साफ तौर पर फूट पड़ा। आंदोलनकारियों का गंभीर आरोप है कि दो दिन बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रबंधन का रवैया बेहद निराशाजनक, संवेदनहीन और अड़ियल बना हुआ है। कुलसचिव (Registrar) को सामूहिक आवेदन सौंपे जाने के बावजूद अब तक प्रबंधन की ओर से बातचीत की कोई पहल नहीं की गई है।

​धरने पर बैठे कर्मचारियों ने आक्रोश जताते हुए कहा:

“विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी जायज मांगों को सुनने के बजाय आंखें मूंदे बैठा है। सालों से कम वेतन पर काम कर रहे श्रमिकों के पेट पर लात मारी जा रही है। प्रबंधन का यह अड़ियल रुख हमारी समस्याओं को सुलझाने के बजाय उन्हें और उलझा रहा है।”

 

स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल

​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाली बात स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग की चुप्पी है। दो दिनों से विश्वविद्यालय परिसर में भारी संख्या में कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन या श्रम विभाग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने अब तक मौके पर पहुंचकर सुध नहीं ली है।

​कर्मचारियों ने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन की यह रहस्यमयी खामोशी कहीं न कहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन के मनमाने रवैये को बढ़ावा दे रही है। जबकि नियमतः प्रशासन को श्रम कानूनों का उल्लंघन रोकने और कर्मचारियों को न्याय दिलाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए था।

व्यवस्थाएं ठप, आगे आंदोलन और तेज होने की चेतावनी

​इस हड़ताल के कारण विश्वविद्यालय का कामकाज और सुचारू संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी वेतन वृद्धि और श्रम अधिकारों की मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका यह अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा और आने वाले दिनों में इसे और उग्र किया जाएगा।

​अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन इस गतिरोध को तोड़ने के लिए कब आगे आता है या फिर स्थानीय प्रशासन इस मामले में कब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है।

ब्यूरो रिपोर्ट: सत्य संवाद समाचार, कटनी

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