देश में अब सिर्फ ‘112’ होगा एकमात्र इमरजेंसी नंबर, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को दिए 3 महीने के भीतर इंटीग्रेशन के आदेश

बड़ा फैसला: देश में अब सिर्फ ‘112’ होगा एकमात्र इमरजेंसी नंबर, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को दिए 3 महीने के भीतर इंटीग्रेशन के आदेश

इंट्रो (Intro):

नई दिल्ली। देशवासियों को अब पुलिस, एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड की मदद के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर याद रखने की झंझट से मुक्ति मिलने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को निर्देश दिया है कि वे आगामी तीन महीने के भीतर सभी आपातकालीन और एंबुलेंस हेल्पलाइन नंबरों को एकीकृत (Integrate) कर सिंगल इमरजेंसी नंबर ‘112’ से जोड़ें।

मुख्य बातें (Key Highlights):

  • सिंगल विंडो सिस्टम: अब 100 (पुलिस), 101 (फायर), 102 और 108 (एंबुलेंस) जैसी सभी सेवाएं एक ही नंबर पर मिलेंगी।
  • सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: जस्टिस जे. के. माहेश्वरी और जस्टिस ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने जारी किए निर्देश।
  • समय सीमा: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को काम पूरा करने के लिए मिला 3 महीने का वक्त।
  • फायदा: आपातकालीन सेवाओं के संचालन में बेहतर तालमेल बैठेगा और जनता को त्वरित मदद मिलेगी।

विस्तृत रिपोर्ट (Detailed Report):

​नागरिकों की सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद अहम कदम उठाया है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जे. के. माहेश्वरी और जस्टिस ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों को संकट के समय बिना किसी देरी के सहायता मिलना उनका मौलिक अधिकार है।

​अक्सर देखा जाता है कि दुर्घटना या आपातकाल के समय लोग घबराहट में सही नंबर (जैसे पुलिस के लिए 100, फायर ब्रिगेड के लिए 101 या एंबुलेंस के लिए 102/108) याद नहीं कर पाते। इसी समस्या को खत्म करने के लिए कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े 1091 नंबर सहित अन्य सभी इमरजेंसी नंबरों को ‘112’ के साथ मर्ज करने का आदेश दिया है।

अदालत की टिप्पणी:

“एक एकीकृत (Integrated) व्यवस्था से न केवल आम जनता को तेजी से मदद मिलेगी, बल्कि अलग-अलग विभागों और आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय (Coordination) भी काफी मजबूत होगा, जिससे कीमती जानें बचाई जा सकेंगी।”

 

​यह व्यवस्था लागू होने के बाद पूरे भारत में अमेरिकी तर्ज (911) पर सिर्फ ‘112’ ही एकमात्र जीवन रक्षक नंबर बनकर उभरेगा।

– ब्यूरो रिपोर्ट, सत्य संवाद समाचार

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