
देहदान का प्रेरणादायी संकल्प
आज की भागदौड़ भरी दुनिया में, जहाँ अधिकांश लोग केवल अपने लिए जीते हैं और जीवन भर अपने व्यक्तिगत हितों तक ही सीमित रह जाते हैं, वहीं ग्राम करेला, तहसील बरही, जिला कटनी निवासी श्री पुष्पेंद्र चतुर्वेदी जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गीता चतुर्वेदी जी ने एक अनुकरणीय एवं समाजोपयोगी निर्णय लेते हुए मृत्यु उपरांत देहदान करने का संकल्प लिया है।
श्री पुष्पेंद्र चतुर्वेदी जी एवं श्रीमती गीता चतुर्वेदी जी दोनों ही शिक्षा एवं ज्ञान के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं तथा अपना अधिकांश समय अध्ययन, चिंतन, योग एवं आध्यात्मिक साधना में व्यतीत करते हैं। श्री चतुर्वेदी जी ने अपने जीवन का उद्देश्य सत्य की खोज एवं मन के परिष्कार को बनाया है। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु उन्होंने विपश्यना साधना को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अंग बनाया है। उनका विश्वास है कि विपश्यना के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को समझ सकता है, मन को निर्मल बना सकता है तथा वास्तविक धर्म के मार्ग पर चल सकता है। वे चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग विपश्यना से जुड़ें और मानवता, करुणा एवं मंगल भावना से युक्त जीवन जिएँ।
इसी क्रम में उन्होंने और उनकी धर्मपत्नी ने मृत्यु के पश्चात अपना शरीर मानव कल्याण हेतु समर्पित करने का संकल्प लेकर समाज के सामने एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका यह निर्णय न केवल चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि समाज को परोपकार और मानव सेवा का महत्वपूर्ण संदेश भी देगा।
वास्तव में, मृत्यु के बाद भी यदि किसी का शरीर किसी जरूरतमंद, चिकित्सा अनुसंधान या भावी चिकित्सकों के प्रशिक्षण के काम आ सके, तो इससे बड़ा मानव सेवा का कार्य और क्या हो सकता है।
ऐसे प्रेरणादायी एवं समाजहितैषी संकल्प के लिए श्री पुष्पेंद्र चतुर्वेदी जी एवं श्रीमती गीता चतुर्वेदी जी हार्दिक बधाई एवं साधुवाद के पात्र हैं। उनका यह निर्णय निश्चित रूप से समाज को नई दिशा देने वाला तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा।
सभी प्राणियों का मंगल हो, सभी सुखी हों। 🙏🏻
