
आम जनता को राहत: यूपीआई लेनदेन रहेगा पूरी तरह मुफ्त, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
यूपीआई पर नहीं लगेगा कोई अतिरिक्त शुल्क, साइबर सुरक्षा और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के लिए लाया जा रहा नया संशोधन।
नई दिल्ली | सत्य संवाद
डिजिटल लेनदेन का इस्तेमाल करने वाले आम नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से लेनदेन करने वाले आम उपभोक्ताओं पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसके साथ ही, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) किए जाने वाले सभी यूपीआई ट्रांसफर पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे।
सरकार का कहना है कि भुगतानों के डिजिटल माध्यम को और अधिक सुरक्षित एवं किफायती बनाना ही इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य है।
व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को राहत
- आम उपभोक्ता पूरी तरह मुक्त: आम जनता को यूपीआई पेमेंट के लिए कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा।
- व्यापारियों का अधिकांश लेनदेन फ्री: छोटे और सामान्य व्यापारियों के ज्यादातर यूपीआई लेनदेन भी पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे।
- मर्चेंट चार्ज की सीमित संभावना: भविष्य में यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू भी होता है, तो वह केवल तय सीमा से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर नाममात्र दर से लगेगा, जो क्रेडिट या डेबिट कार्ड शुल्क से काफी कम होगा।
भुगतान प्रणाली अधिनियम में संशोधन का मकसद
सरकार भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में आवश्यक संशोधन करने जा रही है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यूपीआई व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता, सुरक्षा और तकनीकी मजबूती सुनिश्चित करना है।
- साइबर सुरक्षा पर फोकस: बढ़ते डिजिटल पेमेंट के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने और साइबर सुरक्षा को कड़ा करने के प्रावधान किए जा रहे हैं।
- तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर: सर्वर और तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाया जाएगा ताकि भारी ट्रैफिक के बावजूद पेमेंट फेल न हों।
- गांव-गांव तक विस्तार: यूपीआई को आत्मनिर्भर बनाते हुए इसका दायरा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।
