कटनी का मुसलमान गौ माता को राष्ट्र माता नही राष्ट्रीय पशु बनाना चाहता है

कटनी का मुसलमान गौ माता को राष्ट्र माता नही राष्ट्रीय पशु बनाना चाहता है

गौ संरक्षण पर सामाजिक समरसता की मिसाल: कटनी में उठी गौवंश संरक्षण की मांग, ‘राष्ट्रमाता’ बनाम ‘राष्ट्रीय पशु’ पर छिड़ी चर्चा

विशेष ब्यूरो, कटनी।

भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपरा की धुरी मानी जाने वाली गौ माता के संरक्षण और सम्मान को लेकर देशव्यापी विमर्श लगातार गहराता जा रहा है। जहां एक ओर देशभर के साधु-संत और गौभक्त लंबे समय से गौ माता को “राष्ट्रमाता” घोषित करने की मांग कर रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के कटनी से एक अलग और सकारात्मक पहल सामने आई है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के कुछ प्रबुद्ध वर्ग द्वारा गौवंश के प्रति आस्था जताते हुए उन्हें “राष्ट्रीय पशु” घोषित करने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस मांग को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिल रहे हैं।

विचारधाराओं का विमर्श: ‘राष्ट्रमाता’ या ‘राष्ट्रीय पशु’?

​कटनी में सामने आई इस नई मांग को कुछ विश्लेषक सामाजिक समरसता की दिशा में एक अच्छी पहल मान रहे हैं, क्योंकि इसमें अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से भी गौवंश संरक्षण की चिंता दिखाई देती है।

​दूसरी ओर, परंपरागत गौभक्तों और हिंदू संगठनों का एक बड़ा वर्ग इस पर अलग राय रखता है। उनका कहना है कि जब गौ माता को “राष्ट्रमाता” का सर्वोच्च दर्जा दिलाने का आंदोलन देश स्तर पर पहले से चल रहा है, तब उन्हें केवल “राष्ट्रीय पशु” तक सीमित करने की मांग मूल आंदोलन और उसकी धार्मिक भावना को कमजोर कर सकती है। सनातन परंपरा में गाय केवल एक जीव या पशु नहीं, बल्कि पूजनीय जीवन मूल्यों की प्रतीक हैं।

राजनीति से परे हो गौ संरक्षण: प्रबुद्ध वर्ग

​स्थानीय प्रबुद्ध जनों और सामाजिक विचारकों का मानना है कि गौ संरक्षण का यह पावन विषय राजनीति या किसी धर्म विशेष के विरोध का जरिया नहीं बनना चाहिए। यदि कटनी का मुस्लिम समाज वास्तव में गौवंश का हित और संरक्षण चाहता है, तो इस मांग के साथ-साथ उन्हें हर प्रकार की गौहत्या, तस्करी और गोवंश के प्रति होने वाली क्रूरता का भी खुलकर विरोध करना होगा, चाहे वह किसी भी स्तर पर और किसी के भी द्वारा की जा रही हो।

समरसता और एकता ही मूल मंत्र

​देशहित और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत रखने के लिए यह बेहद आवश्यक है कि गौ सेवा को समाज को विभाजित करने के बजाय जोड़ने का माध्यम बनाया जाए। कटनी से उठी यह चर्चा तब ही सार्थक सिद्ध होगी जब सभी समाज, वर्ग और धर्म के लोग राजनीति से ऊपर उठकर धरातल पर गौवंश की रक्षा के लिए आगे आएंगे।

सत्य संवाद ब्यूरो की रिपोर्ट।

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