अखंड भारत का संकल्प: 14 अगस्त की विभीषिका और खोए गौरव को याद दिलाती डॉ. शिवशरण ‘अमल’ की ओजस्वी पंक्तियां

14 अगस्त: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर डॉ. शिव शरण श्रीवास्तव ‘अमल’ की राष्ट्रभावी रचना
“बंटवारे से पहले वाला, सारा हिंदुस्तान चाहिए…”

​14 अगस्त का दिन भारतीय इतिहास में एक ऐसा जख्म है, जिसकी टीस हर साल ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में देशवासियों के दिलों में ताजा हो जाती है। अखंड भारत के विभाजन का दर्द, लाखों लोगों का विस्थापन और उस दौर में बही अपनों के खून की धारा आज भी राष्ट्र की चेतना को झकझोरती है।

​इसी अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. शिव शरण श्रीवास्तव ‘अमल’ ने अपनी सशक्त और ओजस्वी कविता “अखंड भारत” के माध्यम से देशवासियों को राष्ट्र बोध और संकल्प का संदेश दिया है।

​कविता का मुख्य स्वर: एकता, इतिहास का सच और अखंड भारत की संकल्पना

​डॉ. ‘अमल’ ने अपनी पंक्तियों के जरिए इतिहास की गलतियों, शांति समझौतों में खोए मौकों और विभाजन के पीछे की क्षुद्र स्वार्थी शक्तियों पर कड़ा प्रहार किया है।

    • खोया सम्मान लौटाने का आह्वान: कविता की शुरुआत में ही वे सिंध, बंगाल और पंजाब का स्मरण कराते हुए कहते हैं— ​“छुद्र, स्वार्थी, संघटकों ने, हमको आपस में लड़वाया। टुकड़े-टुकड़े हुए देश के, फिर भी हमको होश न आया।।”

“छुद्र, स्वार्थी, संघटकों ने, हमको आपस में लड़वाया।

टुकड़े-टुकड़े हुए देश के, फिर भी हमको होश न आया।।”

 

      • इतिहास के समझौतों पर आत्ममंथन: ताशकंद और शिमला समझौतों का जिक्र करते हुए कवि ने राष्ट्र के खोए गौरव और संयम की अग्निपरीक्षा पर गहराई से विचार करने को कहा है।
      • नेताजी सुभाष और लाल बहादुर शास्त्री जैसे नेतृत्व की मांग: देशद्रोही मानसिकता और आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए डॉ. ‘अमल’ लिखते हैं कि राष्ट्र को आज फिर से लाल बहादुर शास्त्री और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे दृढ और स्वाभिमानी नेतृत्व की आवश्यकता है।
      • ढाका, पिंडी और कराची तक राष्ट्रध्वज की परिकल्पना: कविता का अंतिम चरण सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आह्वान करता है। कवि की इच्छा है कि कृष्ण की मुरली की गूंज के साथ-साथ सिंधु नदी से लेकर गंगा तक एक बार फिर अखंड भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक एकता स्थापित हो।

​सत्य संवाद का संदेश

​14 अगस्त केवल शोक मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह दिन उन गलतियों से सीखने और राष्ट्र की अखंडता, संप्रभुता तथा सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने का संकल्प लेने का है। डॉ. शिव शरण श्रीवास्तव ‘अमल’ की यह कविता हर भारतीय के मन में देशभक्ति की अलख जगाने का कार्य करती है।

  1. रिपोर्ट: सत्य संवाद डेस्क
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