कृषि उपज मंडी बनी डंपिंग ग्राउंड: सड़ांध और गंदगी से किसान-व्यापारी बेहाल, दावों की खुली पोल
कटनी।
शहर की सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित कृषि उपज, फल एवं सब्जी मंडी इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के आंसू रो रही है। एक तरफ जहां देश और प्रदेश में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, वहीं कटनी की इस मुख्य मंडी की तस्वीरें प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर कर रही हैं। मंडी परिसर में चारों तरफ लगे कचरे के ढेरों से उठने वाली सड़ांध ने यहाँ आने वाले किसानों, व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं का जीना दूभर कर दिया है।
📍 परिसर के बीचों-बीच ‘कचरे का साम्राज्य’
मंडी परिसर से सामने आईं तस्वीरें बेहद भयावह हैं। जिस मुख्य मार्ग से वाहनों का आवागमन होता है और जहां करोड़ों का व्यापार किया जाता है, ठीक उसी रास्ते पर कचरे और सड़ी-गली सब्जियों का अंबार लगा हुआ है। प्लास्टिक की थैलियों, फटे हुए बोरों और मलबे से पटे ये ढेर गवाही दे रहे हैं कि यहाँ कई दिनों से सफाई का झाड़ू तक नहीं चला है।
🦠 बीमारियों का बढ़ा खतरा, आवारा पशुओं का आतंक
बारिश और उमस के इस मौसम में सड़ रही सब्जियों के कारण पूरे इलाके में तीव्र दुर्गंध फैली हुई है। इस गंदगी की वजह से मंडी परिसर मच्छरों और मक्खियों का ब्रीडिंग ग्राउंड (पनपने का केंद्र) बन चुका है, जिससे मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। इसके अलावा, कचरे के ढेरों पर आवारा पशुओं (गाय और सांडों) का जमावड़ा लगा रहता है, जो न सिर्फ आपस में लड़ते हैं बल्कि मंडी में आने वाले लोगों पर भी हमला कर देते हैं। इससे यहाँ हर वक्त किसी बड़ी दुर्घटना का डर बना रहता है।
😡 टैक्स देने के बाद भी बदहाली: व्यापारियों और किसानों में भारी आक्रोश
मंडी में दूर-दराज से अपनी उपज बेचने आने वाले किसानों और स्थानीय व्यापारियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। ‘सत्य संवाद’ से बात करते हुए उन्होंने कहा:
“हम प्रशासन को नियमित रूप से मंडी टैक्स और अन्य शुल्क चुकाते हैं। इसके बावजूद हमें बुनियादी सुविधाएं और साफ-सुथरा माहौल नहीं मिल पा रहा है। वाहनों के ठीक बगल में लगे गंदगी के ढेर के कारण माल को लोड और अनलोड करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।”
❓ करोड़ों के राजस्व वाली मंडी में प्रशासन चुप क्यों?
करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाली इस कृषि उपज मंडी की ऐसी दुर्दशा मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। नियमित रूप से सफाई न होना और कचरे का समय पर निस्तारण न किया जाना स्थानीय अधिकारियों की घोर उदासीनता और तानाशाही को दर्शाता है। आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?

