स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल: कटनी में 13 वर्षों में 10,622 नवजातों और 544 माताओं ने तोड़ा दम

​सत्य संवाद, कटनी।

मध्य प्रदेश के कटनी जिले से स्वास्थ्य सेवाओं की बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। सूचना के अधिकार (RTI) से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 13 वर्षों के दौरान जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और लचर व्यवस्था के कारण 10,622 नवजात शिशुओं और 544 गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है।

​यह आंकड़े न केवल स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोलते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि जमीनी स्तर पर ‘जननी सुरक्षा’ और ‘शिशु संरक्षण’ जैसी सरकारी योजनाएं दम तोड़ रही हैं।

​हर साल औसतन 800 से अधिक मासूमों की मौत

​आंकड़ों का विश्लेषण करें तो स्थिति बेहद भयावह नजर आती है। जिले में हर साल औसतन 817 से अधिक नवजात अपनी पहली सांस पूरी करने से पहले ही दुनिया छोड़ देते हैं। वहीं, प्रसव के दौरान या उसके ठीक बाद हर साल औसतन 40 से अधिक माताएं काल के गाल में समा रही हैं।

​मौत के मुख्य कारण: सुविधाएं कम, रेफरल ज्यादा

​स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन मौतों के पीछे कई बड़े कारण हैं:

    • ​विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी: जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) तक में शिशु रोग विशेषज्ञ (Pediatricians) और स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
    • ​रेफरल का खेल: गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को समय पर इलाज देने के बजाय जबलपुर या अन्य बड़े शहरों के लिए रेफर कर दिया जाता है। रास्ते की दूरी और समय पर एम्बुलेंस न मिलना भी मौतों का बड़ा कारण बनता है।
    • ​कुपोषण और जागरूकता का अभाव: ग्रामीण अंचलों में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) और कुपोषण की समस्या गंभीर है, जिसे समय रहते ठीक नहीं किया जाता।

​एक नजर आंकड़ों पर (13 वर्षों का दर्द):

  • ​कुल नवजातों की मौत: 10,622
  • ​कुल माताओं की मौत (प्रसव के दौरान): 544

 

​जवाबदेही से बचता प्रशासन?

​करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहाए जाने के बावजूद कटनी के स्वास्थ्य सूचकांक (Health Indicators) सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर बार इन मौतों पर जांच का भरोसा दिया जाता है, लेकिन धरातल पर डॉक्टरों की तैनाती और आईसीयू (ICU/SNCU) जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत नहीं किया जा सका है।

​सत्य संवाद का सवाल: आखिर इन 11 हजार से ज्यादा मौतों की जिम्मेदारी किसकी है? क्या सरकार और प्रशासन केवल कागजों पर योजनाएं चलाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहेंगे, या कटनी की माताओं और नौनिहालों को सच में बेहतर इलाज का अधिकार मिलेगा?