मऊगंज में लापरवाही की भेंट चढ़ा नर हाथी, बिजली के तार से झुलसकर मौत; 6 महीने पुराना जोड़ा टूटा

​मऊगंज: देश में एक तरफ गणेश उत्सव की धूम है, तो वहीं मऊगंज जिले से इंसानियत और प्रशासनिक व्यवस्था को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। मऊगंज वन परिक्षेत्र के मलकपुर गांव में बिजली के खुले तार की चपेट में आने से एक नर हाथी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस दुखद हादसे के साथ ही रीवा, सीधी और मऊगंज जिले के जंगलों में बीते 6 महीनों से साथ घूम रहे हाथियों के जोड़े का साथ हमेशा के लिए छूट गया।

​सूंड में फंसा बिजली का तार, मौके पर ही तोड़ा दम

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाथियों का जोड़ा मलकपुर गांव के समीप विचरण कर रहा था। इसी दौरान एक बिजली के खंभे से नीचे लटक रहा नंगा तार नर हाथी की सूंड से छू गया। हाई-टेंशन करंट लगते ही विशालकाय हाथी तड़पकर ज़मीन पर गिर पड़ा और कुछ ही पलों में उसकी जान चली गई। अपने साथी को बेजान देख मादा हाथी चीखने-चिल्लाने लगी, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत और शोक का माहौल है।

​तीन जिलों के वन विभाग का फेलियर: समन्वय नहीं, सिर्फ खदेड़ने का काम

​स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह हादसा विशुद्ध रूप से वन विभाग की नाकामी का नतीजा है। बीते छह महीनों से यह जोड़ा मऊगंज, रीवा और सीधी जिलों की सीमाओं में घूम रहा था। तीनों जिलों के वन अधिकारियों को इसकी पल-पल की जानकारी थी। बावजूद इसके, हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बनाने या उन्हें घने जंगलों में भेजने की बजाय अधिकारी सिर्फ उन्हें एक जिले की सीमा से दूसरे जिले में खदेड़ने की रस्म अदायगी करते रहे।

​मऊगंज रेंजर पर लगे गंभीर आरोप

​हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा मऊगंज वन विभाग और रेंजर वर्षा सिंह बिसेन पर फूट पड़ा। ग्रामीणों ने रेंजर और स्थानीय अमले पर निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • ​बिजली विभाग से तालमेल की कमी: हाथियों की मौजूदगी वाले संवेदनशील इलाकों में बिजली सप्लाई बंद करवाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
  • ​निगरानी में लापरवाही: हाथियों की ट्रैकिंग और सुरक्षा को लेकर जमीनी स्तर पर कोई ठोस पेट्रोलिंग नहीं की जा रही थी।
  • ​मुख्यालय से दूरी: रेंजर पर आरोप है कि वे कार्यक्षेत्र में नियमित रूप से मौजूद रहने के बजाय रीवा से दफ्तर का संचालन कर रही थीं।

​’सत्य संवाद’ का सवाल: बेजुबान की मौत का जवाबदेह कौन?

​हादसे की खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा, जो जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।

​जब वन विभाग को बीते आधा साल से हाथियों की मौजूदगी की जानकारी थी, तो बिजली तारों को दुरुस्त करने या बिजली कटौती के इंतज़ाम क्यों नहीं किए गए? क्या कागजी बैठकों में व्यस्त रहने वाले अफसरों पर इस बेजुबान की मौत की जिम्मेदारी तय होगी, या हर बार की तरह यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? सत्य संवाद इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करता है।