‘अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरुओं को प्रणाम’: सत्य संवाद पर जानें गुरु पूर्णिमा का महत्व

‘अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरुओं को प्रणाम’: सत्य संवाद पर जानें गुरु पूर्णिमा का महत्व

सत्य संवाद नेटवर्क कटनी

​भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा का सबसे पावन उत्सव ‘गुरु पूर्णिमा’ देशभर में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और कृतज्ञता के साथ मनाया जा रहा है। गुरु के प्रति अनन्य भक्ति और सम्मान को समर्पित यह पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ तिथि पर ज्ञान के भंडार और चार वेदों के विभाग करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का प्राकट्य हुआ था। यही कारण है कि इस पावन दिन को ‘व्यास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है।

महर्षि वेदव्यास: ज्ञान के आदि स्रोत

सत्य संवाद की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कि गुरु पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य की उस पवित्र परंपरा का उत्सव है जिसने युगों-युगों से समाज को मार्गदर्शन दिया है। महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत, अष्टादश पुराणों और ब्रह्मसूत्र जैसे ग्रंथों की रचना कर मानव जाति को ज्ञान की अतुलनीय निधि सौंपी। सनातन धर्म में उन्हें प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है, इसलिए इस दिन गुरु पूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

माता-पिता: जीवन के प्रथम और परम गुरु

गुरु केवल वही नहीं जो हमें किताबी या अध्यात्म का ज्ञान दें; हमारे जीवन में प्रथम गुरु का स्थान हमारे माता-पिता का होता है। माँ हमें बोलना और चलना सिखाती है, तो पिता हमें दुनिया का सामना करना और सही मार्ग पर चलना सिखाते हैं। माता-पिता दिन-रात निस्वार्थ भाव से संघर्ष करते हैं ताकि हमारे भविष्य को सुंदर और उज्ज्वल बनाया जा सके। गुरु पूर्णिमा का यह पर्व हमें अपने माता-पिता के चरणों में भी कृतज्ञता व्यक्त करने का सुअवसर प्रदान करता है।

संस्कार और संस्कृति का प्रतीक

आज के आधुनिक युग में, जहाँ भौतिकता की अंधी दौड़ बढ़ रही है, गुरु पूर्णिमा जैसा पर्व हमें अपनी जड़ों, मूल्यों और संस्कारों से जोड़े रखने का काम करता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि बिना गुरु के मार्गदर्शन के जीवन की सच्ची दिशा पाना असंभव है।

‘सत्य संवाद’ की विशेष अपील:

इस गुरु पूर्णिमा पर आइए हम सब मिलकर अपने गुरुजनों, शिक्षकों और अपने माता-पिता के प्रति सच्चे मन से आभार व्यक्त करें। उनके बताए सन्मार्ग पर चलने का संकल्प ही उनके प्रति हमारी सबसे बड़ी और सच्ची गुरु दक्षिणा होगी।

‘सत्य संवाद’ परिवार की ओर से आप सभी पाठकों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!

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