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आज से शुरू हुआ शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि, जानें स्थापना से लेकर विजयादशमी तक की पूरी तिथियां और नियम
सत्य संवाद डिजिटल डेस्क |
देशभर में आज यानी अक्टूबर 2026 से शक्ति और उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्रि (महा नवरात्रि) की भव्य शुरुआत हो चुकी है। पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घरों और मंदिरों में घटस्थापना (कलश स्थापना) की गई है। अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना की जाएगी। यह पावन पर्व 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी (दशहरा) के साथ संपन्न होगा।
प्रमुख तिथियां और कैलेंडर (एक नजर में)
- 11 अक्टूबर 2026: मां शैलपुत्री पूजा व घटस्थापना (पहला दिन)
- 12 अक्टूबर 2026: मां ब्रह्मचारिणी पूजा (दूसरा दिन)
- 13 अक्टूबर 2026: मां चंद्रघंटा पूजा (तीसरा दिन)
- 18 अक्टूबर 2026: दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी)
- 19 अक्टूबर 2026: महानवमी और मां सिद्धिदात्री पूजा
- 20 अक्टूबर 2026: विजयादशमी, रावण दहन और प्रतिमा विसर्जन (दशहरा)
शारदीय नवरात्रि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
- महिषासुर मर्दिनी का स्वरूप: पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर नामक राक्षस से भीषण युद्ध किया था और अश्विन शुक्ल नवमी को उसका वध किया था, जिसके बाद से उन्हें ‘महिषासुर मर्दिनी’ कहा जाने लगा।
- अकाल बोधन पूजा: मान्यता है कि भगवान श्री राम ने लंका विजय और रावण वध से पहले मां दुर्गा की नौ दिनों तक विशेष पूजा (अकाल बोधन) की थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें विजय श्री प्राप्त हुई थी।
- स्वास्थ्य और सात्विकता: शरद ऋतु के संधिकाल में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बनाए रखने के लिए उपवास और सात्विक जीवन शैली का विशेष महत्व है। साथ ही, गुजरात और महाराष्ट्र समेत पूरे देश में गरबा और डांडिया का उल्लास देखने को मिलता है।
व्रत और पूजा के दौरान क्या करें और क्या न करें?
क्या करना चाहिए? (Do’s)
- नियमित पूजा: प्रतिदिन सुबह और शाम स्नान कर मां दुर्गा की कपूर व दीपक से आरती करें।
- सात्विक आहार: व्रत के दौरान कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, फल और दूध का सेवन करें। सामान्य भोजन में भी पूर्ण सात्विकता बनाए रखें।
- मंत्र जाप व पाठ: प्रतिदिन ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का जाप या दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
- कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराएं।
क्या नहीं करना चाहिए? (Don’ts)
- तामसिक भोजन से परहेज: इन नौ दिनों में घर में प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और अंडों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रखें।
- बाल और नाखून काटने से बचें: नवरात्रि के दौरान दाढ़ी-मूंछ बनवाना, बाल कटवाना और नाखून काटना शास्त्रों में वर्जित माना गया है (विशेषकर कलश स्थापना करने वालों के लिए)।
- क्रोध और क्लेश से दूरी: घर में वाद-विवाद, गाली-गलौज या किसी की निंदा न करें, इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
- घर को खाली न छोड़ें: यदि घर में अखंड ज्योति या कलश स्थापना की गई है, तो घर को पूरी तरह सूना या ताला लगाकर न छोड़ें।
मां दुर्गा के 9 रूपों के प्रिय भोग (9 Days Bhog List)
माता को प्रसन्न करने के लिए उनके स्वरूप के अनुसार निम्नलिखित भोग अर्पित करें:
- दिन 1 (मां शैलपुत्री): गाय का शुद्ध घी या उससे बनी मिठाइयां (आरोग्य प्राप्ति हेतु)।
- दिन 2 (मां ब्रह्मचारिणी): शक्कर, सफेद मिठाई या मिश्री (लंबी आयु हेतु)।
- दिन 3 (मां चंद्रघंटा): दूध या दूध से बनी मिठाई जैसे खीर (मानसिक शांति हेतु)।
- दिन 4 (मां कुष्मांडा): मालपुआ (बुद्धि और निर्णय क्षमता हेतु)।
- दिन 5 (मां स्कंदमाता): केला (उत्तम स्वास्थ्य हेतु)।
- दिन 6 (मां कात्यायनी): शहद या मीठा पान (आकर्षण और सुंदरता हेतु)।
- दिन 7 (मां कालरात्रि): गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयां (संकटों से रक्षा हेतु)।
- दिन 8 (मां महागौरी): नारियल या नारियल की बर्फी (मनोकामना पूर्ति हेतु)।
- दिन 9 (मां सिद्धिदात्री): तिल, हलवा-पूरी और चना (समस्त सिद्धियों हेतु)।
अष्टमी, नवमी और कन्या पूजन 2026 के शुभ मुहूर्त
- महाअष्टमी (18 अक्टूबर 2026, रविवार):
- अष्टमी तिथि समाप्त: रात 08:35 बजे तक।
- कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त (सुबह): सुबह 07:47 से दोपहर 12:06 तक।
- महानवमी (19 अक्टूबर 2026, सोमवार):
- हवन और पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 06:24 से सुबह 10:40 बजे तक।
- व्रत का पारण और अंतिम कन्या पूजन इसी दिन किया जाएगा।
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