
“दिग्विजय सिंह का दोहरा चेहरा: खुद को बताते हैं सनातनी, लेकिन ‘हिंदू’ शब्द से नफरत क्यों?”
इंदौर, 16 मई: मध्य प्रदेश की सियासत में अक्सर अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मौका था इंदौर के रेसीडेंसी कोठी का, जहां दिग्विजय सिंह और भाजपा की फायरब्रांड नेता व पूर्व मंत्री उषा ठाकुर के बीच ‘सनातन धर्म’ और धार्मिक पहचान को लेकर एक दिलचस्प और अनोखी बहस देखने को मिली।
राजनीतिक मतभेदों से परे, दोनों नेताओं के बीच इस दौरान भाई-बहन जैसी आत्मीयता और आपसी सम्मान भी नजर आया, लेकिन दिग्विजय सिंह के बयानों ने एक नई राजनीतिक बहस को हवा दे दी है।
“मैं घोर सनातनी हूं…”: दिग्विजय सिंह का दावा
रेसीडेंसी कोठी में रुकने के दौरान जब बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंचे थे, तभी वहां भाजपा नेता उषा ठाकुर भी पहुंच गईं। उषा ठाकुर वहां मौजूद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से सनातन धर्म को लेकर चर्चा करने लगीं। इसी बीच दिग्विजय सिंह वहां आ पहुंचे और उन्होंने उषा ठाकुर के सामने खुद को देश का सबसे बड़ा सनातनी घोषित कर दिया।
दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा, “मैं घोषणा करता आया हूं और आज फिर कर रहा हूं कि मैं घोर सनातन धर्म को मानने वाला हूं। मेरे कहने के बाद ही आप लोगों ने सनातन धर्म को स्वीकार किया है, पहले आप लोग सिर्फ हिंदू-हिंदू धर्म करती थीं।”
उषा ठाकुर का पलटवार: “आप निजी जीवन में सनातनी, पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करते”
दिग्विजय सिंह के इस दावे पर उषा ठाकुर ने भी बेहद शालीनता लेकिन बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “आप मेरे बड़े भाई जैसे हैं। आप अपने निजी जीवन में तो बहुत कट्टर सनातनी हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से आप इसे उस तरह स्वीकार नहीं करते।”
इस पर तुरंत पलटवार करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, “मैं तो यहीं, सबके सामने सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार कर रहा हूं कि मैं सनातनी हूं।”
“क्या तुमने कभी नर्मदा परिक्रमा की है?”
बहस को आगे बढ़ाते हुए दिग्विजय सिंह ने अपनी धार्मिक निष्ठा के प्रमाण देते हुए उषा ठाकुर से पूछा, “मैं हर तरह से सनातनी हूं… क्या तुमने कभी नर्मदा परिक्रमा की है? क्या तुम एकादशी का व्रत रखती हो?” इस पर उषा ठाकुर ने मुस्कुराते हुए ना में सिर हिला दिया।
उषा ठाकुर ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ और कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की जीवन पद्धति और संस्कृति का आधार है।
‘हिंदू’ और ‘सनातनी’ शब्द पर दिग्विजय का पुराना स्टैंड
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह लंबे समय से ‘हिंदू’ और ‘सनातनी’ शब्दों के बीच के अंतर पर अपना राजनीतिक स्टैंड रखते आए हैं। कुछ समय पहले भी उन्होंने कहा था कि ‘हिंदू’ शब्द वैदिक नहीं बल्कि पारसी (Persian) शब्द है, जो एक भौगोलिक पहचान को दर्शाता है, जबकि हमारा मूल धर्म ‘सनातन’ है जिसका अर्थ है अनंत। वे अक्सर भाजपा और आरएसएस पर ‘हिंदुत्व’ के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं।
इंदौर में हुई यह दिलचस्प बहस अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। जहां एक तरफ लोग राजनीतिक कड़वाहट के बीच दोनों नेताओं की इस सहज बातचीत की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दिग्विजय सिंह के “मेरे कहने पर भाजपा ने सनातन माना” वाले बयान पर नया सियासी घमासान शुरू होना तय माना जा रहा है।
– सत्य संवाद समाचार ब्यूरो
