कटनी सत्य संवाद विशेष: मध्य प्रदेश को ‘गो-संरक्षण’ का वैश्विक मॉडल बनाने की तैयारी, मुख्यमंत्री को सौंपा गया 8 सूत्रीय मांग पत्र

कटनी सत्य संवाद विशेष: मध्य प्रदेश को ‘गो-संरक्षण’ का वैश्विक मॉडल बनाने की तैयारी, मुख्यमंत्री को सौंपा गया 8 सूत्रीय मांग पत्र

कटनी | मध्य प्रदेश में गोवंश के संरक्षण, सुरक्षा और उन्हें संवैधानिक दर्जा दिलाने के संकल्प के साथ ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ ने एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रेषित एक विस्तृत प्रार्थना पत्र के माध्यम से अभियान ने प्रदेश में गो-आधारित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और देशी गोवंश को ‘राज्य माता’ घोषित करने की पुरजोर मांग की है।

मुख्य मांगें: गोवंश को मिले ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा

​अभियान की ओर से तहसीलदार/एसडीएम के माध्यम से भेजे गए इस ज्ञापन में मुख्य रूप से 8 बिंदुओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है:

  • संवैधानिक मान्यता: केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर देशी गोवंश को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने और राज्य स्तर पर ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग।
  • कठोर कानून: गो-तस्करी और गो-वध को ‘गैर-जमानती अपराध’ की श्रेणी में रखकर दोषियों की संपत्ति कुर्क करने और आजीवन कारावास का प्रावधान।
  • स्वतंत्र मंत्रालय: केंद्र में पृथक गोपालन मंत्रालय की स्थापना हेतु अनुशंसा और प्रदेश की सभी अवैध वधशालाओं के लाइसेंस तुरंत निरस्त करने की अपील।
  • आर्थिक मॉडल: पंचगव्य (गोबर-गोमूत्र) अनुसंधान को बढ़ावा देकर इन्हें प्राकृतिक कृषि और सरकारी खरीद तंत्र से जोड़ना। स्कूलों के मिड-डे मील और मंदिरों के प्रसाद में केवल देशी गौ-घृत और दूध का उपयोग अनिवार्य करना।

सड़कों पर नहीं, आंगन में होगा गोवंश का वास

​ज्ञापन में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि वर्तमान में गोवंश सड़कों पर असुरक्षित है और पॉलीथीन खाने को विवश है। इसके समाधान के लिए हर ग्राम पंचायत में ‘नंदीशाला’ और जिला स्तर पर ‘आदर्श गो अभयारण्य’ बनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, राजमार्गों पर दुर्घटनाग्रस्त होने वाले गोवंश के लिए ‘गौ-वाहिनी एम्बुलेंस’ और आधुनिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की भी मांग की गई है।

शिक्षा में ‘गो-विज्ञान’ का समावेश

​आने वाली पीढ़ी को गोवंश के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व से जोड़ने के लिए स्कूली पाठ्यक्रमों में ‘गो-विज्ञान’ को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, गोचर और ओरण भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए ‘गोचर विकास बोर्ड’ के गठन पर भी बल दिया गया है।

सत्य संवाद की राय:

मध्य प्रदेश पहले ही ‘गो-कैबिनेट’ बनाकर देश में मिसाल पेश कर चुका है। यदि ये 8 सूत्रीय मांगें लागू होती हैं, तो प्रदेश न केवल सांस्कृतिक रूप से बल्कि आर्थिक रूप से भी ‘आत्मनिर्भर’ बनने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

 

ब्यूरो रिपोर्ट: सत्य संवाद समाचार

दिनांक: 27 अप्रैल 2026

स्थान: कटनी (म.प्र.)

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