निजी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा एक्शन: अब महंगी किताबों और यूनिफॉर्म के लिए नहीं कर सकेंगे मजबूर

निजी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा एक्शन: अब महंगी किताबों और यूनिफॉर्म के लिए नहीं कर सकेंगे मजबूर

कटनी (सत्य संवाद समाचार): निजी स्कूलों द्वारा हर साल किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों की जेब ढीली करने के खेल पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगा दी है।

क्या है नया निर्देश?

​शिक्षा विभाग द्वारा जारी ताजा निर्देशों के अनुसार, अब कोई भी निजी स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से ही किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर पाएगा।

आदेश की मुख्य बातें:

  • विक्रेता चुनने की आजादी: अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार खुले बाजार में किसी भी दुकान से सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे।
  • किताबों की सूची अनिवार्य: स्कूलों को नए सत्र की शुरुआत से पहले किताबों और अन्य शिक्षण सामग्रियों की सूची सार्वजनिक रूप से नोटिस बोर्ड और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी।
  • कमीशनखोरी पर वार: अक्सर देखा जाता है कि स्कूल प्रबंधन और चुनिंदा पुस्तक विक्रेताओं के बीच साठगांठ होती है, जिससे अभिभावकों को एमआरपी (MRP) पर भारी कीमत चुकानी पड़ती है। इस नए आदेश से ऐसी गतिविधियों पर रोक लगेगी।

शिकायत के लिए बनाए गए जिला स्तरीय दल

​प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले में निगरानी दल गठित किए गए हैं, जो अभिभावकों की शिकायतों का त्वरित निराकरण करेंगे।

अभिभावकों में खुशी की लहर

​सत्र की शुरुआत में ही आए इस फैसले से मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिली है। सत्य संवाद से चर्चा करते हुए कई अभिभावकों ने कहा कि स्कूलों की ब्रांडिंग के नाम पर जो लूट मची थी, उस पर यह एक जरूरी प्रहार है।

सत्य संवाद की राय: शिक्षा एक सेवा है, व्यापार नहीं। प्रशासन का यह कदम न केवल आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी लाएगा। जरूरत इस बात की है कि स्थानीय स्तर पर भी शिक्षा विभाग इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराए।

ब्यूरो रिपोर्ट: सत्य संवाद समाचार

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